: श्रृंगेश्वर धाम पर 108 कुण्डीय महारूद्र यज्ञ का 6 मई से होगा आयोजन,आयोजन को लेकर तैयारिया हुई आरंभ,श्रद्धालुओ की बैठक का दौर जारी
Admin
Tue, Mar 7, 2023
माही नदी एंव मधुुकन्या नदी के संगम पर स्थित श्री श्रृंगेश्वर धाम, वैदिक पुराणो मे भी इसका उल्लेख

श्रृंगेश्वर धाम
धार(अशोक नायमा/धरमचंद दय्या)- धार-झाबुआ जिले की सीमा पर माही नदी एंव मधुुकन्या नदी के संगम पर स्थित श्री श्रृंगेश्वर धाम पर 6 से 12 मई तक 108 कुण्डीय महारूद्र यज्ञ श्रंृगेश्वर धाम का आयोजन होगा। बताया जाता है की धार एंव झाबुआ जिले मे यह अब तक सबसे बडी 108 कुण्डीय महारूद्र यज्ञ होगा। श्रृंगेश्वर धाम के गादिपति मंहत श्री रामेश्वर जी महाराज के तत्वाधान मे उक्त यज्ञ का आयोजन होगा। यज्ञ के दौरान कई महान संतों का आगमन भी होगा। आयोजन को लेकर बैठक का दौर जारी है तथा आयोजन को लेकर समिति एवं श्रद्धालुओं के द्वारा तैयारियां की जा रही है।
मंदिर परिसर के खाली जमीन पर विशाल यज्ञ शाला के निर्माण के साथ कई बीघा भूभाग मे उक्त आयोजन होगा। श्री श्रृंगेश्वर महादेव धाम काफी प्राचीन होने के साथ ही वैदिक पुराणो मे भी इसका उल्लेख किया गया है।

श्रद्धालुओ ने बताया की करीब 150 बाय 150 के भुभाग पर विशाल यज्ञशाला का निर्माण राजस्थान के कारीगरो के द्वारा किया जायेगा। संभवत 25 मार्च से यज्ञशाला के निर्माण का कार्य आरंभ हो सकता है।

श्रृगेश्वर धाम एक परिचयः-श्रृंगेश्वर धाम की स्थापन्ना कैसे हुई इसका वर्णन वेद पुराणो मे भी है। बताया जाता है की एक महान तपस्वी ऋषि श्री श्रृंगी जी थे जिनका वाल्मिकी रामायण में वर्णन आता है। इन्ही ऋषि ने अयोध्या के राजा दशरथ को सन्तान प्राप्ती हेतु पुत्र कामेष्टि यज्ञ करवाकर राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसी आदर्श सन्तानों की उपलब्धता करवाई थी । ये विभाण्डक ऋषि के पुत्र तथा कश्यप ऋषि के पौत्र थे। इनके माथे पर ब्रह्मा जी के अभिषाप से श्रृंग अर्थात सिंग की आकृति बन गई थी और ब्रह्माजी की घोर तपस्या के फलस्वरूप ही इसका निदान भी प्राप्त हुआ था। इन्हे इस श्रृंग समस्या के निवारण हेतु अंग देश सहित कई पावन तीर्थो तथा पाप विनाशक स्थानो पर ले जाया गया था किन्तु निवारण नही हो सका था। कालान्तर में ब्रह्माजी की तपस्या से श्रृंगी ऋषि को इस अद्भुत स्थान का ज्ञान हुआ। देशाटन (भ्रमण) करते हुए श्रृंगी ऋषि जब इस स्थान पर जहाॅ पुण्य सलिला माही नदी तथा मधुकन्या नदी का पुनित संगम स्थल है। श्रृंगी ऋषि ने जैसे ही स्नान-सन्ध्या की वैसे ही उनके माथे से सिंग स्वतः ही विलोपित हो गया। यह घटना आश्चर्य जनक थी। इसी वनवासी स्थान पर तपस्या के पश्चात श्रृंगी ऋषि गोंडा स्थित सुप्रसिद्ध शिवालय जो सुभगनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है, वही पर अपने अन्तिम समय तक तपस्या में लीन रहै। इसी आध्यात्मिक प्रसंग के कारण से ही इस अद्भुत और अनुपम चमत्कारिक स्थल को श्रृंगी ऋषि के नाम पर ही श्रृंगेश्वर धाम की प्रसिद्धि प्राप्त हो गई ।
माही और मधुकन्या नदी के संगम पर स्थित श्रृंगेश्वर धाम
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