शिक्षक दिवस पर विशेष : खेल-खेल में शिक्षा से बच्चों के सपनों को लग रहे पंख,शिक्षा जगत में चमका गांव का नाम,स्कुल को दी एक नई पहचान
Bakhtavar Express
Thu, Sep 4, 2025
चिराखान-शिक्षक समाज का निर्माता होता है। इसलिए जो सम्मान शिक्षक का है, वह किसी और को प्राप्त नहीं है। क्षेत्र में कुछ ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने अपनी कार्य पद्धति से उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने अपने कार्य को केवल नौकरी तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि समाज में कीर्तिमान भी स्थापित किया है।ऐसे ही गाव चिराखान के मजरे छोटे से गाव बामनियापाड़ा के प्राथमिक विद्यालय ने पदस्थ शिक्षक अनिल खाण्डे एवं श्री मति कविता खाण्डे है जिनका मानना है कि शिक्षा केवल किताबों में बंद नहीं होनी चाहिए, बल्कि जीवन के हर पहलू से जोड़ा जाना चाहिए। जिसमें बच्चे खेलते हुए ही जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षाएं सीखते हैं।ये दोनो शिक्षक-शिक्षिका बच्चो को यह सिख देते है की शिक्षा केवल किताबों में बंद नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे जीवन के हर पहलू से जोड़ा जाना चाहिए। इसी सोच के तहत शासकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक अनिल खाण्डे एवं महिला शिक्षक श्री मति कविता खाण्डे ने खेल-खेल में पढ़ाई का अनूठा तरीका अपनाया है, जिसमें बच्चे खेलते हुए ही जीवन की महत्वपूर्ण शिक्षाएं सीखते हैं।

ये बच्चो को खेल-खेल में शिक्षा के प्रति रुचि को बढ़ाने में लगे हुए है।इनका प्रयास होता है कि स्कूल के प्रति बच्चों में आकर्षण बढ़े, इसके लिए हर संभव कोशिश करते हैं कि बच्चों को उनकी अभिरुचि के अनुरूप गतिविधि कराकर पढ़ाया जाए। ये बच्चों को पहाड़ा याद कराने के साथ फूल और फूल के नाम गीतों के माध्यम से सीखाते है। शासकीय प्राथमिक विद्यालय मे हर सुबह एक नया सवेरा होता है, जहां शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के सपनों को पंख दिए जाते हैं।एवं बच्चे को संस्कार भी दिए जाते यहा के बच्चे विद्यालय मे खाना खाने से पहले भोजन मंत्र का उच्चारण करते है जिसके बाद भोजन ग्रहण करते है। इस परिवर्तन की धारा को दिशा देने वाले शिक्षक शिक्षीका हैं अनिल खाण्डे एवंं श्री मति कविता खाण्डे वह समय पर स्कूल पहुंचकर बच्चों के आने का इंतजार करते हैं।एवं प्रतिदिन बच्चो के लिए कुछ न कुछ खाने के लिए फल एवं चाकलेट लाते है जिससे बच्चों मे स्कुल आने की उत्सुकता बनी रहती है।
शिक्षक अनिल खाण्डे कहते हैं कि बच्चे जब स्कूल आते हैं तो वह उनका स्वागत करते हैं। बच्चों के पालक भी अपने बच्चों को अनिल खाण्डे के सुपुर्द करते हुए कहते हैं कि अब वे निश्चिंत हो जाते हैं कि उनके बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई की ओर आगे बढ़ेंगे। पालकगण कहते हैं कि बच्चे जब घर जाते हैं तो मैडम जो खेल-खेल में पढ़ाती हैं उसी अंदाज में वे घर में खेलते हुए पढ़ाई करते हैं।
शिक्षा जगत में चमका गांव का नाम,स्कुल को दी एक नई पहचान
शासकीय प्राथमिक विद्यालय बामनियापाड़ा में कार्यरत शिक्षक अनिल खाण्डे ने विद्यालय को कई उपलब्धियां दिलाई हैं। अभी गत दिनो शिक्षा विभाग के सर्वे मे पुरे बदनावर विकास खण्ड मे शिक्षा के क्षेत्र मे पांचवा स्थान प्राप्त किया है।वर्ष 2023 मे टीम मंथन गुजरात द्वारा भारत के 12 राज्यों से चयनित 120 शिक्षको का गिजु भाई बधेका सम्मान समारोह डिसा के गोगा ढाणी मे आयोजीत किया गया जिसमे अनिल कुमार खाण्डे एवं शिक्षिका श्रीमति कविता खाण्डे को सम्मानित किया गया था।
उन्होंने बताया कि एक समय था जब स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम होती थी, लेकिन अनिल खाण्डे के नेतृत्व में न सिर्फ दर्ज संख्या में बढ़ोतरी की अपितु स्कूल को एक नई पहचान भी दी है।
फुलवारी के बीच चलाते बच्चों की क्लास
प्रधानाध्यापक अनिल खाण्डे कार्य के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों में भी विश्वास रखते हैं। अपनी मेहनत और लगन के आधार पर विद्यालय परिसर को महकती फुलवारी में बदल दिया है। विद्यालय परिसर में रंग-बिरंगे गुलाब व तरह-तरह के फुलो के पौधे आम ,पीपल,बेल्वपत्र,पलाश,नीम आदि पौधे विद्यालय परिसर मे लगा रखे हैं। शिक्षक अनिल खाण्डे ने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए पुस्तकालय, दिवारो पर पेंटीग के साथ खेल-खेल मे पढ़ाई के लिए सांप सीड़ी का पोस्टर बना रखा है।जिससे बच्चे खेल-खेल मे पढ़ाई करते हैं। शिक्षक अनिल खाण्डे जरूरतमंद बच्चों की सहायता भी करते है।बच्चो को कपड़, कापी, किताब, पेन एवं पट्टी पहाड़ा आदि शिक्षण सामग्री खरीदकर देते है।
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