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भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

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: जब ज्ञान की गंगा में हम लोग गोता लगाते हैं तो सब पाप धुल जाते हैंः- श्याम लता दीदी

Admin

Sat, Apr 15, 2023


भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ श्रीमद् भागवत कथा का आरंभ

चिराखान। एयर कंडीशनर में बैठने से बीमारी हो सकती है, लेकिन भागवत कथा में बैठने से कभी भी बीमारी नहीं होती ।कलश यात्रा में मेरा मन गदगद हो गया जैसे कि किसी को धन, वैभव की प्राप्ति होने से, तो किसी कोढी के अंग आज आने से खुशी मिलती है इतनी खुशी मुझे कलश यात्रा में आपका भाव देखकर मिली आप लोगों ने अपने अपने घरों में ताले लगाकर आप सभी यहां आए आप बधाई के पात्र हैं सभी ने जो इस यज्ञ का आयोजन रखा आप सभी पर परमात्मा की कृपा होती रहे ऐसी भागवत् रुपी पावन गंगा में हम सब गोता लगाते रहे। जब ज्ञान की गंगा में हम लोग गोता लगाते हैं तो सब पाप धुल जाते हैं । उक्त विचार श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन कथा वाचिका श्याम लता दीदी वृंदावन धाम द्वारा कहे गए ।


आपने कहा की यह वह गंगा है। परमात्मा की कृष्ण स्वरूप गंगा में जिसने गोता लगा लिया वह भवसागर से पार हो गया। इस पावन गंगा में स्नान करने मात्र से जीवन मरण समाप्त हो जाता है ऐसी पावन गंगा आपके गाँव में बह रही है। आप सभी भक्तों पर परमात्मा की असीम कृपा हुई है ।आप लोगों ने पूर्व जन्म में जरूर संत महापुरुषों की सेवा करी होगी तभी जाकर आपको यह फल मिला है एक जन्म नहीं कहीं जन्म में आप ने पुण्य किया होगा सेवा की होगी दान दिया होगा बहुत बड़ा पुण्य का काम किया होगा जब यह पुण्य का काम करने का सौभाग्य मिला है। संपत्ति, धन और वैभव चाहे पापी हो दुराचारी हो तब भी प्राप्त हो जाता है, लेकिन संतों का सानिध्य नहीं मिलता है यह सत्संग का मिलना बड़ा दुर्भाग्य है आपके ह्रदय में अहंकार, अधर्म, पाप भरा होता है आप सब भूल जाते है आओ हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि इस सप्त दिवसीय भागवत पुराण को आए तो किसी प्रकार का कोई विघ्न नहीं आए जिससे हम इसे सुनने से वंचित रह जाए। जिस परमात्मा ने यह सुंदरता का मानवता शरीर हमें प्रदान किया है उस परमात्मा की हम एक बार वंदना करें एक बार यह मानव शरीर मिलता है तो देवता भी मानव शरीर पाने के लिए तरस जाते हैं यह मानव शरीर बार-बार नहीं मिलता है। जिस परमात्मा ने हमें यह शरीर दिया उसको हम एक बार भी याद नहीं करते है एक बार जो इंसान भगवान का ध्यान करने लग जाता है तो वह भवसागर से पार हो जाता है ।

भाग्य से मनुष्य तन पाया है सारी योनीया भोग की योनी बताई गई है लेकिन मनुष्य योनी कर्म योनी बताई गई है कर्म ही प्रधान है यह भारत भूमि कर्म की भूमि है इस भूमि पर जितने भी भगवान के अवतार हुए इस भूमि पर हुए हैं। । आगे आप ने कहा कि माता-पिता की सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। जब भी आपके गुनाहों का खाता खुलेगा तब माता-पिता की सेवा जमानत बनेगी। कथा मे आपने तीन तापो का भी वर्णन किया देविक ताप वैदिक और भौतिक ताप आपने कहा कि यह ताप आज से नहीं आदी से है। यह वह है जो कभी किसी व्यक्ति को टीबी, शुगर जैसी बिमारी हो जाती है तो डॉक्टर उसे मीठा खाना बंद करवा देता है हम केवल देख सकते हैं खा नहीं सकते जिस चीज से शरीर को नुकसान होता है उससे आप परहेज करते हैं मगर शराब हमें मृत्यु की ओर ले जा रही है उसे आप बंद नहीं कर सकते हैं।

हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि लोगों को व्यसन की लत लग चुकी है। यह व्यास पीठ शिक्षा का केंद्र है यहां वह दवा है जो शरीर के साथ-साथ जीव को भी औषधीय प्रदान करती है। यह जिंदगी मिली है इसे जियो सम्मान से अगर इसे नहीं जीना चाहते हैं तो खत्म कर दो। आपने दूसरे ताप वैदिक ताप के बारे में कहा कि हम कभी गर्मी पड़ती है तो भी सहन नहीं कर सकते हैं, ठंड पड़ती है तो सहन नहीं कर सकते प्राकृतिक ताप को वैदिक तब कहा जाता है । आपने तीसरे ताप भौतिक ताप के बारे में बताया मेहनत मजदूरी करने से हम अपने बच्चों को पढ़ाई-लिखाई , एशो आराम,शादी ब्याह नहीं कर सकते हैं आजकल अगर धन नहीं है तो बेटियों को जलाया जाता है अगर दहेज नहीं दिया जाता है तो बेटीयो की शादी नहीं होती है।हमारे घर मे अगर बेटा जन्म लेता है तो खुशियां मनाई जाती मगर बेटी जन्म लेती हैं तो दुखी हो जाते हैं अगर ऐसा ही होता रहा तो इस देश मे बेटिया खत्म हो जाएगी तो आप लोग बहू कहां से लाओगे क्या मिट्टी की बहू लाओगे । गरीब कहते हैं अगर मुझे बेटी दे दी तो मुझे धन भी देना ,व्यक्ति किसी दौलत से धनवान नहीं होता है अगर बहू कुलक्षणी आ जाए तो उस घर की बर्बादी निश्चित है जिस घर मैं संस्कारी बहू आती है वहा स्वर्ग बना देती है और वह घर तरक्की की ओर बढ़ता है जब से हमारे घर में बहू आ जाती दिन दुगुनी और रात चैगुनी तरक्की होती है। राम राज में भी तीन तप होते थे मगर किसी को सताते नहीं थे कृष्ण की शरण में आने से ही सब ताप खत्म हो जाते हैं अगर हम बहुसागर से पार होना चाहते हैं तो घूमते फिरते हमें भागवत रुपी अमृत का पान करना चाहिए। आपने कहा कि चिराखान में कथा हुई तो यह गांव धन्य हो गया है मनुष्य योनि से बढ़कर कोई योनि नहीं है यह मानवता पाना बड़ा दुर्लभ है लेकिन इस क्षणभंगुर शरीर को पाकर हम कितना अभिमानी हो जाते हैं किसी के पास धन दोलत मिलने से अहंकार हो जाता है हम यह सभी साथ नहीं ले जाते हैं तो फिर अहंकार क्यों करते हैं अंत समय में मरने के बाद कोई भी हमारे साथ नहीं आता है एक कोने में एक छोटा सा बिछोना होता है जिस पर हम पड़े रहते हैं और परिवार वालों द्वारा शमशान में जला दिए जाते हैं या दफना दिए जाते हैं या फिर पानी में प्रवाहित कर दिए जाते हैं जिससे जीव जंतु द्वारा खाए जाते हैं ।

कथा से पुर्व कलश यात्रा निकाली गई जिसमें श्रीमद्भागवत पुराण की पोती को गाजे बाजे व आतिशबाजी के साथ मुख्य यजमान पोती को सिर पर धारण कर नगर के मुख्य मार्गो से होते हुए कथा पंडाल पर पहुंचे। कलश यात्रा संतोषी माता मंदिर से कलश में जल भरकर बैंड बाजा और ढोल नगाड़ों के साथ निकाली गई। गांव में जगह-जगह कलश यात्रा का स्वागत किया गया कलश यात्रा में सैकड़ों महिला एवं बालिकाओं ने भाग लिया।कलश यात्रा मे पुरे रास्ते आयोजक समिति द्वारा ठंडे जल व चिल्ड वाटर की व्यवस्था की गई थी।लोगों ने अपने-अपने घरों से पुष्प वर्षा की कथा पंडाल में मंगल कलश की स्थापना कर पूजन हुआ इसका लाभ मुख्य यजमान श्याम जायसवाल ने लिया व्यास पीठ पर विराजित होने के बाद कथा वाचिका व संगीत मंडली के सदस्यों का आयोजक समिति द्वारा स्वागत किया गया । आयोजक समिति द्वारा लगभग नौ हजार वर्ग फुट का पंडाल बनाया गया है श्री मद्भागवत महापुराण में मुख्य यजमान सपत्नीक श्याम जायसवाल द्वारा आरती का लाभ लिया गया।महा प्रसादी के लाभार्थी सरपंच कालुराम भाभर रहे।गांव के शिव मंदिर व बाबा रामदेव मंदिर में सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 15 अप्रैल से 21 अप्रैल तक अंतरराष्ट्रीय श्री श्री 108 स्वामी परमानंद जी महाराज की परम शिष्या प्रसिद्ध कथा वाचिका देवी श्याम लता दीदी (वृंदावन धाम) के मुखारविंद से दोपहर 12 बजे से शाम 400 बजे तक किया जा रहा है। कथा में आसपास के क्षेत्र के लोग भी शामिल हो रहे हैं। रात्रि मे विशाल भजन संध्या का आयोजन हुआ। आयोजन में समस्त ग्रामीणों को अच्छा सहयोग मिल रहा है।

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