: व्यास गादी से वही शब्द बोलना चाहिए जिससे संवाद हो विवाद नहीं हो - प्रभु जी नागर,बरमखेडी मे श्री राम मंदिर की द्वितीय वर्षगांठ पर हुआ एक दिवसीय सत्संग का आयोजन
Admin
Mon, May 22, 2023
बरमंडल । जो निंदा रस मे लगे हुए है जो बुरी बातो मे लगे हुये हैै। उसका जीवन व्यर्थ है। मुर्ख के आगे मौन हो जाओ मुर्ख के आगे मौन वही हो सकता है जो सत्संग सुनता है । सत्संगी संवाद करता है विवाद नही। उक्त प्रेरक उद्गार समीपस्थ ग्राम बरमखेडी मे पं. प्रभुजी नागर ने श्री राम मंदिर की द्वितीय वर्षगांठ पर आयोजित एक दिवसीय सत्संग के दौरान कही।
एक वर्ष बाद ग्राम मे प्रभु जी नागर के आगमन की सूचना मिलने पर बड़ी संख्या मे क्षेत्र भर के श्रद्धालु बडी मात्रा मे पलभर मे जुट गये। आपने कहा की व्यास गादी से वही शब्द बोलना चाहिए जिससे संवाद हो विवाद नहीं हो। हाॅ कभी कभी खरा भी बोलना पड़ता है लेकिन वह विवाद का माध्यम नही होना चाहिये। ज्ञान के ऊपर बोलते हुए आपने कहा की भीड़ को सरकार या प्रशासन नहीं संभालता इसे ज्ञान और भगवान श्री राम ही संभाल रहे है। बंदूक की नोक पर भी भीड नही संभल सकती है। बडे बडे मंदिर मे भीड़ नियंत्रित करने के लिये बैरिकेट लगाये जाते है। आपने उसका उदाहरण देते हुए बताया की चिटी का अनुशासन देखो एक ही लाइन मे चलती है। उसी प्रकार हमें हमेशा लाइन से ही चलना चाहिये नही तो आदमी भटक जाता है। लाईन ज्ञान की भी होती है।
क्षेत्र के लोगों के बारे मे कहा की अच्छाई के कारण ही आज यहां पर अच्छे लोग बैठे है। शराब छोड दी बुरी आदतों का त्याग कर दिया। सत्संगी हो गये और गौशाला खोल दी। यह कथा भी इन लोगों के लिये बैरिकेटस का काम करती है।
प्रभु जी नागर ने कहा की सत्संग कथा अच्छे लोगों के लिये है। बुरे लोगो के लिये नही है। मेहनत करना है तो अच्छे लोगों के लिये करना । गुण का सदैव विद्यमान रखने के लिये सत्संग कथा करते रहना चाहिये।

कथा के समापन के बाद आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। पं. प्रभु जी नागर ने श्रद्धालुओं से कहा प्रभु की भक्ति मे लगे रहो वै आपके जीवन का उद्धार कर देगे। वही श्री राम मंदिर की द्वितीय वर्षगांठ पर मंदिरों को आकर्षक सजाया गया था । दिनभर श्रद्धालुओं ने दर्शन वंदन किये।
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