: अन्नदाता मेरे देश का पेड़ से लटक कर सो रहा है सुना है मेरा इंडिया डिजिटल हो रहा है, बड़वेली में हुआ कवि सम्मेलन का आयोजन, तेज ठंड में देर रात तक काव्य रस में डूबे रहे श्रोता
Admin
Tue, Jan 7, 2025
सरदारपुर। वनवासो से घुमकर रामलला घर आए है,जन्म हुआ था अयोध्या में रामलला घर आए है। यह पंक्तियां कवि अजय पाटीदार द्वारा बडवेली में रात को हुए कवि सम्मेलन में सुनकर इस कविता पर श्रोताओं से खूब तालियां बटोरी गई, श्रोताजन भावविभोर हो गए थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के तस्वीर पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित करके डा. ललिता लहर की सरस्वती वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात सरदारपुर के कवि देवराज गोराना द्वारा यूनियन कार्बाइड के कचरे पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी कर देश के किसानों की स्थिति पर कहा कि अन्नदाता मेरे देश का पेड़ से लटक कर सो रहा है सुना है मेरा इंडिया डिजिटल हो रहा है जिसको कृषकों ने खूब सराहा, आशीष त्रिवेदी द्वारा ओज की कविता पड़ी गई। कवि संदीप यादव ने मालवी हास्य से लोगों का बहुत मनोरंजन किया। पंकज प्रखर ने जवानों जवानी में दम होना चाहिए,खून इस उमर में गरम होना चाहिए,भक्ति की बात चले अगर कहीं पर,
तो पहले राष्ट्र फिर धरम होना चाहिए। श्रृंगार रस की कवित्री ललिता लहर इंदौर ने अधरों पर मुस्कान रखती हूं, नजरों में स्वाभिमान रखती हूं, हां मैं बेटी हूं हिंदुस्तान की, अपने मुंह में अपनी जुबान रखती हूं कविता पर खूब दाद बटोरी गई। कवि सम्मेलन के सूत्रधार राम परिंदा ने श्रृंगार गीत से श्रोताओं को सच्चाई यह भी स्वीकार होना चाहिए, जीत को जीत, हार को हार होना चाहिए,जो धर्म को मानते हैं पर धर्म की नही मानते,ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए कविता पर आनंदित कर दिया।आयोजन समिति के भूपेंद्र पाटीदार ने सभी श्रोताओं व कवियों का आभार माना।
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