: संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी,औरो के लिए बने प्रेरणा का स्त्रोत सेवानिवृत अधिकारी विश्वकर्मा ,सेवानिवृत्ति के बाद रंगों की दुनिया मे दिखाया अपना हुनर,अस्पताल मे बीमारी मे भी रोज बनाया एक कैलेंडर,अब दोस्तो को करेगे भेंट
Admin
Fri, Dec 13, 2024
सरदारपुर। व्यक्ति जीवन मे जब हार मान लेता है तो उसके जीवन मे एक तरह से ठहराव हो जाता है। व्यक्ति को सुख-दुख हर परिस्थिति मे संघर्ष करते रहना चाहिए तभी वह एक सफल व्यक्ति बन कर औरो के लिये प्रेरणा का स्त्रोत बनता है। आज हम एक ऐसे ही संघर्षशील व्यक्ति से रूबरू करा रहे है जिसने बचपन से लेकर अपनी सरकारी सेवा के दौरान संघर्ष किया। लेकिन हर बार संघर्ष का हौसले के साथ सामना कर अपनी काबिलियत बताई। सरदारपुर तहसील के छोटे से गांव पदमपुरा के निवासी एसआर विश्वकर्मा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा इंदौर के कार्यपालन यंत्री के पद से 10 वर्ष पहले सेवानिवृत्त हुये थे। 70 वर्ष की आयु पुर्ण कर चुके श्री विश्वकर्मा ने जीवन के हर पड़ाव पर संघर्ष किया लेकीन कभी हार नही मानी। सरकारी नौकरी से जब सेवानिवृत हुये तो सोचा था की समय व्यतीत नहीं होगा लेकिन कलाकारी का हुनर रखने वाले विश्वकर्मा ने इस दौरान अपने आप को हर समय व्यस्त रखा।
कुडे से लेकर पत्थरों को अपने हुनुर से नया रूप देने वाले एस.आर. विश्वकर्मा हर वर्ष अपने मित्रो के लिये हाथो से कैलेंडर बनाते है। और लेखनी इतनी सुंदर की हर कोई तारीफ किये बिना नही रहता हैै। कुछ माह पुर्व जब उन्हे ह्रदयघात हुआ तो अस्पताल मे भर्ती होने के दौरान भी उन्होंने कैलेंडर बनाने का कार्य जारी रखा।
श्री विश्वकर्मा कहते हे हजारो उलझने राहो मे और कोशिशें बेहिसाब है इसी का नाम जिंदगी है बस चलते रहिये। पिछले तीन माह से ऑपरेशन के बाद बैड रेस्ट कर रहे श्री विश्वकर्मा प्रतिदिन एक कैलेंडर हाथो से बना रहे है। जिन्हे वै नववर्ष के पुर्व अपने मित्रो को भेंट करेगे। यही अपने इस हुनुर को इन्होने अमेरिका मे रह रहे अपने बेटे और पोते पोतियों को भी सिखाया है ।
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