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: सहनशक्ति बिना लाइसेंस का ताकतवर हथियार- संत श्री नागर जी, बाल संत गोविंद नागर ने भी दिये प्रवचन बोले सुधारना हो तो बेटी को सुधारना,आयोजन समिती ने तीर कमान भेट कर बाल संत का किया सम्मान

Admin

Sun, Mar 3, 2024
https://youtu.be/hR0hug3HNi0


सरदारपुर। सुधारना हो तो बेटी को सुधारना बहु को मत सुधारना। बेटी ही आगे चलकर बहु बनेगी। आप अच्छे संस्कार अपनी बेटी को देना तो वह आगे चलकर एक अच्छी बहू बनेगी। यदि आप अपनी बेटी को अच्छे संस्कार नहीं दोगे तो वह एक अच्छी बहू नहीं बन पायेगी। उक्त उद्गार आदिवासी बाहुल्य देदला मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान बाल संत गोविंद जी नागर ने व्यासपीठ से कहे।

कथा के पांचवे दिन करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति मे शुरुआत के एक घंटे तक बाल संत गोविंद जी नागर ने गृहस्थ जीवन पर एक प्रेरक उद्बोधन दिया। कथा आरंभ के पुर्व गोविंद जी नागर का आदिवासी जैकेट एंव तीर कमान भेंट कर सम्मान किया गया। कथा के दौरान आपने कहा की व्यक्ति मकान बनाता है तो नक्शे के अनुसार बनाता है। मकान मे किचन,कमरा बरामदा सभी होता है उसमे एक हाल भी होता है। जहा पर बैठकर घर परिवार के लोग मेहमान वार्तालाप करते रहते है।

आपने कहा की हाल माल खाने के लिए नही होता बल्कि वह समस्या के हल के लिये होता है। ताल बजाने के लिये हाल नहीं होता बल्कि समस्या सुनने के लिये हाल होता है आने वाले की समस्या सुन उसका हल करो यही मानवता है।


गोविंद जी नागर ने कहा की संकट इसलिये आता है की उससे अपने पराये की पहचान हो जाती है। कौन अपना है और कौन पराया। आपने कहा की जो किसी मानव का कष्ट नही देखता है उसका साथ नही देता वह नरक का भागी है।  


वही कथा के दौरान संत श्री पंडित कमल किशोर जी नागर ने कहा की आपको परमात्मा ने उस लायक बनाया है तो गांव मे कुछ ना कुछ उत्सव कराया करो कभी सुंदरकांड का पाठ कराओ तो कभी हवन,यज्ञ कराओ । अच्छे काम करने वालों को इस दुनिया मे परेशानियों का सामना करना पडता है लेकिन दुष्ट व्यक्ति को कभी भी इस प्रकार की स्थिति का सामना नही करना पडता।
संत श्री नागर जी ने श्रद्धालुओं से कहा की अच्छे की एक ही पहचान है की वह मार खाता है। अच्छाई अच्छाई होती है उसके गुण गाये जाते है। अच्छे व्यक्ति के स्मारक बनते है और चोराहे पर लगते है।
सहनशक्ति बिना लाइसेंस का ताकतवर हथियार है। घर मे रखे जितने भी ताकतवर हथियार है उनमे वह ताकत नहीं जो सहन शक्ति मे होती है।

वही  भी विपदा या परेशानी आये थोडा सा सह लेना जीवन आराम से गुजर जायेगा। जिसना नही सहा वह जेल चला जाता है। और जेल गये तो आपको कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पडेगा।
संत श्री ने कहा की आशीर्वाद से उम्र बढ़ती है और कुकर्म से उम्र घटती है। उम्र बढ़ाने को सबसे अच्छा साधन आशीर्वाद है। रावण की उम्र 10 लाख 60 हजार वर्ष थी लेकिन वह जब कुकर्म पर चला तो उसका समय से पहले ही विनाश हो गया। कुमार्ग पर चलने से उम्र घट जाती है।
आपने कहा की आप पुलिस को खरीद सकते हो ,राजनीति मे हस्तक्षेप कर सकते हो लेकिन प्रकृति की व्यवस्था मे कुछ भी नहीं कर सकते हो वहा तो उसका खुद का लेवल चलता है।

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