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: श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीने ओर मरने की कला सिखाती है --पं. पाठक

Admin

Thu, May 30, 2024


राजोद।। वीर परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन विश्रांति पर कथा वाचक पं.दीपेश पाठक ने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने ओर मरने की कला सिखाती हैं पं. पाठक ने व्यासपीठ से श्रीकृष्ण के सोलह हजार एक सौ आठ विवाह कथा सुनाते हुवे कहा कि भौमासुर नामक असुर के बन्दीगृह से हजार एक सौ राजकुमारीयो को भगवान श्रीकृष्ण ने मुक्त करवाया ओर सम्मान पुर्वक समाज में रह सके इसलिए सभी को अपनी पत्नी स्वीकार कर लिया।क्योंकि वे सब भौमासुर की कैद मे रहकर आई थी।इसलिए इनसे विवाह करने कोई तैयार नही था। पति कि अर्थ केवल मांग मे सिंदुर भर देना नही होता या गले मे मंगल सुत्र बांध बांध देना नही होता ।स्वामी पति का अर्थ है रक्षक ओर सबके रक्षक भगवान है। पं. पाठक ने कहा कि यदुवंशियों ने संतो का अपमान किया तो संतो के श्राप से यदुवंशी का नाश हो गया। ओर छप्पन करोड़ यादव आपस मे लडकर भगवान की आंखों के सामने नष्ट हो गए।सात दिन की श्रीमद्भागवत कथा श्रवण कर महाराज परिक्षीत मोक्ष को प्राप्त हुए। भागवत कथा भवसागर पार करती है। कथा के सातवें दिन बडी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण की। अतं आरती कर महाप्रसादी वितरित की गई।

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