ब्रेकिंग

नगर केमिस्ट एसोसिएशन का हुआ गठन, जाट अध्यक्ष,मारू बने सचिव

सरदारपुर में जनगणना अन्तर्गत मकान सूचीकरण का कार्य हुआ प्रारंभ, प्रगणकों के द्वारा तैयार किया जा रहा है मैप

तहसील विधिक सेवा समिति द्वारा श्रम दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर का किया आयोजन

पिकअप हादसे मे मृत ग्रामीणो के परिजनो को विधायक ग्रेवाल देंगे 25-25 हजार की सहायता

भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

सूचना

: सतगुरु एक दीपक की तरह होता है सच्चा सतगुरु जब आपको मिलता है तो आपका जीवन तर जाताः- श्यामलता दीदी

Admin

Mon, Apr 17, 2023


चिराखान। बाबा रामदेव व शिव मंदिर पर चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचिका श्री देवी श्यामलता दीदी वृंदावन धाम ने वारह अवतार, नरसिंह अवतार,जड़, भरत और भगवान वामन अवतार प्रसंग सुनाया उन्होंने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ तथा अहंकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है और यह भी बताया कि यह धनसंपदा क्षणभंगुर होती है। इसलिए इस जीवन में परोपकार करो उन्होंने कहा कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती हैं । यदि हम संसार में पूरी तरह मोह ग्रस्त और लिप्त रहते हुए सांसारिक जीवन जीते हैं तो हमारी सारी भक्ति एक दिखावा ही रह जाएगी। कथा के दौरान वामन अवतार की झांकी दिखाई गई और तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत भर दे झोली पर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

उन्होंने आगे कहा कि सतगुरु एक दीपक की तरह होता है सच्चा सतगुरु जब आपको मिलता है तो आपका जीवन तर जाता है और यदि मदिरा पिया हुआ व्यक्ति भी उनके चरण स्पर्श कर लेता है तो उसकी बुद्धि में भी परिवर्तन हो जाता है । जहां मदिरा का पान होता है वहां कलयुग का वास होता है और जहां जुआ, सट्टा, वेैश्यावृत्ति और हिंसा होती है वहां पर भी कलयुग का वास होता है। जिस घर में शराब और मांस का सेवन होता है उस घर भगवान का वास नहीं होता है। यह काम मानव का नहीं दानव का होता है। यदि गाय को भी मांस का एक टुकड़ा डाल देते है,तो वह भी उसे नहीं खाती है। और जो व्यक्ति मांस का सेवन करता है वह पशु के समान होता है। उन्होंने कहा कि यह जीवन तीन पन्ने की डायरी है एक पन्ना वह है जो मां के गर्भ में धारण है उस पर परमात्मा की कृपा होती है दूसरा पन्ना वह है जब हम इस दुनिया से चले जाते हैं जब मृत्यु हो जाती है। और तीसरा पन्ना खाली रहता है जिससे हमें और आपको क्या लिखना है यह आपके ऊपर हैं कि उसमें सत्कर्म करोगे या दुष्कर्म इस शरीर को बनाने में परमात्मा को नौ महीने लगते हैं लेकिन इस जीवन को संभालने में 90 दिन लग जाते हैं फिर भी यह संभल नहीं पाता है ।

भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती है।उन्होंने कहा की हमे सुबह उठते ही अपने हाथो की लकीरो के दर्शन करना चाहिए। लेकिन आज कल हाथो के दर्शन नही युवा मोबाईल के ,बुजुर्ग बिड़ी, गुटके के दर्शन करते हैं तो भगवान के दर्शन कैसे होगें। श्री मद्भागवत महापुराण में मुख्य यजमान सपत्नीक श्याम जायसवाल द्वारा आरती का लाभ लिया गया।महा प्रसादी के लाभार्थी रामलाल पाटीदार रहे।आयोजन मे आस पास के क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु कथा का रसपान कर रहे हैं। मंदिर मे पुजा अर्चना एवं दर्शन की व्यवस्था पंडित सुरेश चंद्र शर्मा द्वारा की जा रही है।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें