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: समस्याओं से झुझता हुआ रूपारेल का प्राथमिक विद्यालय,आधा किमी के दायरे मे 1  से 5 तक की कक्षाएं तीन अलग-अलग कक्षो मे हो रही संचालित,खतरो के बीच सड़क पार कर मध्यान भोजन करने जाना पडता है बच्चो को

Admin

Mon, Dec 9, 2024
सरदारपुर। एक समय था जब ग्राम से लेकर शहर तक प्राथमिक विद्यालयो मे शिक्षा का स्तर बेहतर था। शहरी अंचलो मे तो निजी विद्यालयो की तुलना मे सरकारी विद्यालयो मे विद्यार्थीयो की संख्या कम होती जा रही है। लेकिन ग्रामीण अंचलो मे आज भी सरकारी विद्यालयो मे विद्यार्थियों की संख्या अपेक्षा से अधिक है। कमीयो से जूझते विद्यालय मे सेवा भावी शिक्षक बच्चो की नीव मजबूत करने मे जी जीन से जुटे रहते है। आज हम सरदारपुर तहसील के एक ऐसे विद्यालय की जमीनी हकीकत बताने जा रहे है जो समस्याओ से दो चार होने के बाद भी विद्यालयो के बच्चो को शिक्षा दे रहे है वह किसी निजी विद्यालय से कम नही है।   सरदारपुर तहसील के सुदूर ग्रामीण अंचल रूपारेल मे स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय ऐसी कई जटिल समस्याओं से घिरा हुआ है लेकिन यहा पर पदस्थ शिक्षको कर्तव्य निष्ठा के साथ अपने कार्य का निर्वहन कर रहे है। प्राथमिक विद्यालय रूपारेल मे 208 बच्चे दर्ज है जिन्हे पढाने के लिये 6 शिक्षक पदस्थ है। गांव से कई परिवार पलायन कर गये फिर भी बच्चो की उपस्थिती प्रतिदिन 130 से 150 है। लेकिन इस विद्यालय मे समस्या यह है की 1 ली से पॉचवी तक के बच्चे अध्ययन एक परिसर मे न करते हुये आधा किमी के दायरे मे फैले तीन कक्षो मे करते है। समस्या यह नही है की बच्चे अलग-अलग भवनो मे अध्ययन करते है बल्कि समस्या यह है की जब बच्चे अध्ययन कर मध्यान भोजन के लिये आधा किमी दुर पैदल सडक पार कर दुसरे भवन पर जाते है। इस दौरान शिक्षक तो साथ ही होता हे लेकीन हमेशा वाहनों की आवाजाही एंव तेज रफतार वाहनो के बीच दुर्घटना का डर बना रहता है।   1 ली से 3 री तक की कक्षाएं एक भवन मे लगती है तो 4 थी की कक्षा एक अन्य अतिरिक्त कक्ष और पांचवी की कक्षा दुसरे अन्य अतिरिक्त कक्ष मे लगती है। इन भवनो के बीच की दुरी करीब आधा किमी होगी। यही नही जहा पर 4 थी की कक्षा लगती है वहा पर पेयजल युनिट बनी हुई है लेकीन जहा पर बच्चे अध्ययन करते है वहा पर पेयजल युनिट नही बनी हुई है। जिसके कारण बच्चे पानी की केन से पानी पीते है कुछ बच्चे हैंडपंप पर जाकर भी अपनी प्यास बुझाते है। वैसे यदि शासन इन बच्चो के लिये एक ही परिसर मे शिक्षा पाने की व्यवस्था कर दे तो छोटे-छोटे बच्चों को काफी सुविधा होगी।

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