ब्रेकिंग

युवाओ ने वाट्सअप ग्रुप बनाकर मन्दिर का किया जीर्णोद्धार,सिधेश्वर हनुमानजी की होगी नवीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा

278 बूथों पर 40 हजार बच्चों को पिलाई जाएंगी दवाई,46 टीम की गए गठित

युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने मां अमका झमका माता एवं महाराव बख्तावर सिंह का किया पूजन

सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र मे 6 नए चिकित्सको की पदस्थापना के आदेश जारी,MLA ग्रेवाल ने विधानसभा मे रखी थी मांग

जन संघ के नेता के निधन पर केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने शोक संवेदना व्यक्त की

सूचना

: खरमोर अभयारण्य में लग रही पवन चक्कियों पर रोक के आदेश!,प्रवासी पक्षी कैसे आएंगे, मापदंड़ों और प्रतिबंधों के बाद पवन चक्कियों कैसे लगाई गई!

Admin

Tue, Mar 19, 2024

_

     धार। जिले के सरदारपुर विकासखंड के पानपुरा में खरमोर अभयारण्य बना है। इस अभयारण्य को कम्पार्टमेंटों, अधिसूचित 13 गांवों, ब्लॉक और 10 किलोमीटर की परिध‍ि में आने वाले भू-भाग को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की नियामावलियों के विधानों के अंतर्गत प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। इस अभयारण्य में खरमोर पक्षी के आस्तित्‍व एवं उसके जीवन को संकट में लाने वाले विभ‍िन्‍न क्रियाकलापों और गतिविध‍ियों पर रोक है। इसके बावजूद क्षेत्र में पवन चक्कियों की स्‍थापना की जा रही है। यह पवन चक्कियां खरमोर के जीपन के लिए अभिशाप होने के साथ खतरा भी है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पवन चक्कियों पर रोक लगाने और जांच के आदेश दिए हैं। 

     पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्त्ता छोटू शास्त्री ने इस मामले में पहल करते हुए इसे शासन के समक्ष उठाया था। उनकी पहल पर प्रदेश के वन विभाग ने पवन चक्कियों के प्रोजेक्ट पर रोक लगाकर जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने शिकायत की थी कि पवन चक्कियों की ब्‍लेड के कारण आकाश में स्‍वछन्‍द विचरण करने वाले पक्षियों के भयाक्रांत होने की आशंका है। ये पवन चक्कियां इन पक्षियों के लिए ध्‍वनि प्रदूषण का भी एक बड़ा कारण सिध्‍द हो सकती हैं। इस कारण पूरी दुनिया में पक्षी अभ्यारण्यों के आसपास पवन ऊर्जा के प्रोजेक्‍ट प्रतिबंधित हैं। लेकिन, केंद्र सरकार के पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन के प्रतिबंध के बावजदू इस क्षेत्र में व पवन चक्कियां लगाने का कार्य जारी है।

     इस अभयारण्य में व‍िशेष रुप से अप्रवासी पक्षी खरमोर अपने प्रजनन के लिए आते है। लेकिन, उन्हें इस पवन चक्कियों के आकार और इनसे निकलने वाली ध्‍वनि के प्रदूषण से प्रजनन में बाधा उत्‍पनन होगी। सारे मापदंडों और प्रतिबंधों के बावजूद इस क्षेत्र में पवन चक्कियों की स्‍थापना कैसे की जा रही है! केंद्र सरकार की मंशा के विपरित पवन चक्कियां लगाने वाला गैर कानूनी कार्य किन अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं अनुसंशा पर किया गया, यह भी जांच का विषय है।

*विशेष जोन की क्षेणी में आता है अभयारण्य* 

    पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस क्षेत्र को 'स्‍पेशल इको झोन' का दर्जा दिया है। राजपत्र पर दिनांक 8 अक्‍टूबर 2019 के पृष्‍ठ क्रमांक 6 पर उल्‍लेख‍ित कंडिका की 4 सारणी के पाइंट 2, पाइंट 14 व पाइंट 33 में स्‍पष्‍टता से उल्‍लेखित है कि वे उघोग जिनके क्रियाकलाप ध्‍वनि प्रदूषण न करते हों, भूमिगत विद्युत केबल का उपयोग व नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बायो मास और सौर ऊर्जा का उपयोग करने पर ही उन्हें परमिशन दी जा सकती है।

*क्या है खरमोर पक्षी* 

   खरमोर पक्षी या लेसर फ्लोरिकन भारत की बस्टर्ड पक्षी प्रजाति का सबसे छोटा पक्षी है। भारत में बस्टर्ड प्रजाति के तीनों सदस्य ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, लेसर फ्लोरिकन और बंगाल फ्लोरिकन घास के मैदानों के संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यह पक्षी घास के मैदानों के कीड़ों को खाकर इन मैदानों को बचाते हैं और इस ही वजह से ये आसपास के किसानों के दोस्त भी कहे जाते हैं।

   खरमोर अपनी कम होती संख्या के कारण गंभीर रूप से लुप्तप्राय की श्रेणी में आता है। इसकी लगातार कम होती संख्या के पीछे विशेषज्ञों द्वारा कई कारण बताये जाते हैं लेकिन इस क्षेत्र में पवन ऊर्जा संयंत्रों की बढ़ती संख्या इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा क्षेत्र में नीलगाय का बढ़ता प्रभाव, कृषि में प्रयोग किये जाने वाले कीटनाशक और स्थानीय लोगों का आक्रामक रवैया भी खरमोर पक्षी की कम होती संख्या के लिए जिम्मेदार हैं।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें