: मनुष्य की पहचान उसकी जाति, रंग, परिवार से नहीं बल्कि उसके कर्मों से होती है -- नागर जी, शबरीधाम आश्रम जयन्ती धाम मे राम-लक्ष्मण ओर शबरी की मूर्तियाँ हुए स्थापित, एक कुंडी यज्ञ भी हुआ सम्पन्न
Admin
Wed, May 21, 2025
सरदारपुर। शबरीधाम आश्रम जयन्ती धाम मे पं.कमल किशोर जी नागर के कर कमलो द्वारा मंगलवार को माता शबरी और राम-लक्ष्मण की मूर्तियाँ स्थापित की गई एवं एक दिवसीय सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग मे श्रीमद्भागवत कथा में भक्तों को भागवत कथा सुनाते हुए संत श्री नागर जी ने कहा कि दुनिया भले कह दे कि भगवान नही मिलते है वह इस संसार मे नहीं है। तो तुम इन पापीयो के चक्कर मे रे मत जाणा ये कह दे की कहा है भगवान किसने देखा भगवान किसको मिला भगवान तो जो फोकट की बात करते है तो उनसे ही पुछना की आप कह रहे हो कि भगवान नहीं है और हम कह रहे है कि भगवान है तो नहीं है इसका क्या प्रमाण है।
आपने कहा की भगवान से अगर कुछ मांगना है तो संतोष रूपी धन मांगना चाहिए और संतोष रूपी धन संतो से प्राप्त होता है।जिस इंसान में इमान है वही भगवान है। उन्होने माता शबरी की भक्ति और राम-लक्ष्मण के साथ उनके संबंधों का वर्णन करते हुए कहा की मनुष्य को कभी भी भरोसा नही तोड़ना चाहिए। माता शबरी को उनके गुरु ने कहा था कि एक बार भजन मत करना लेकिन भरोसा कभी मत तोड़ना, हिम्मत मत हारना एक दिन तुम्हे भगवान राम के दर्शन अवश्य होगे एवं वो एक दिन जरूर आयेंगे।वही वचन एक दिन सत्य हुए और भगवान राम शबरी की कुटीया मे आये और शबरी की इच्छा पुरी की।उन्होंने कहा कि मनुष्य की पहचान उसकी जाति, रंग, परिवार से नहीं होती बल्कि उसकी पहचान उसके कर्मों से ही होती है।इसलिए हमारे कर्म अच्छे होने चाहिये।उन्होने कहा की भागवत कथा सुनने से भगवान की प्राप्ती होती है।भागवत कथा वाचक पं. कमल किशोर नगर ने कहा भगवान को भोग मत लगाना परंतु अपने माता-पिता को सबसे पहले भोजन परोसना। पंडित कमल किशोर नागर ने कहा कि भगवान भी आपका भोग तभी स्वीकार करेंगे जब आप पहले अपने माता-पिता को भोजन कराएंगे। मां-बाप दुबारा नहीं मिलेंगे इसलिए उनकी सेवा करो। सच्चे मन से कथा सुनो तभी आपका मोक्ष संभव हो सकेगा। कथा मे श्रद्धालुओं का हजारो की संख्या मे जन सैलाब उमड़ पड़ा।कथा स्थल पर सुंदर साज-सज्जा की गई थी। एक दिवीय भागवत कथा मे हजारो की संख्या मे गुरुभक्तो का उमड़ा जन सैलाब।समिती द्वारा लगभग दस हजार स्क्वायर फीट का पांडाल बनाया गया था।वो भी छोटा पड़ गया।चिलचिलाती धुप मे भी लोगो का उत्साह कम नही पड़ा।
इस अवसर पर एक कुण्डीय यज्ञ का आयोजन किया गया।यज्ञ में मुख्य यजमान लक्ष्मण वसुनिया पदमपुरा थे,कैलाश निनामा हनुमंत्या,रामचन्द्र गामड़ हनुमंत्या,राधेश्याम कटारा हनुमंत्या,भेरुलाल डोडियार बालौद ने वैदिक मंत्रोंच्चार के साथ यज्ञकुण्ड मे साकल्य की आहुतियां दी । यज्ञ प.गजेन्द्र शर्मा दसाई के आचार्यत्व में संपन्न हुआ।इस अवसर पर एक दिवसीय सत्संग का आयोजन किया गया। कथा के पश्चात महा प्रसादी वितरीत कि गई।विज्ञापन
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