: अमझेरा जैन तीर्थ पर जिनालय शुद्धिकरण किया
Admin
Tue, Sep 5, 2023
अमझेरा | अमझेरा में श्री अमिझरा पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर तीर्थ पर जिनालय शुद्धिकरण का कार्य किया गया| इसमें समाजजनों के द्वारा बढ चढकर हिस्सा लिया गया | दिनांक 3 सितम्बर को अमिझरा तीर्थ के साथ साथ पुरे भारतवर्ष के लगभग 2000 में जैन मंदिरों में जिनालय शुद्धिकरण का कार्य एक समय पर किया गया | प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी पर्युषण पर्व प्रारम्भ होने के पूर्व एक साथ 2000 जैन मन्दिरों का शुद्धिकरण कार्य परम पूज्य आचार्य देवेश जन-जन की आस्था के केन्द्र श्री नवरत्नसागर जी महाराजा की विशिष्ट प्रेरणा से उनके कृपा प्राप्त शिष्य पूज्य आचार्य श्री युवा ह्रदय सम्राट महामांगलिक प्रदाता श्री विश्वरत्नसागर जी महाराज साहब की छत्र छाया में नवरत्न परिवार एवं मालवा महासंघ के द्वारा विगत 12 वर्षो से सतत् करते हुए अपने 13 वें वर्ष में संपूर्ण मालवा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, वागड़, उतराखंड, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों में स्थित 2000 जैन मंदिरों का एक साथ शुद्धिकरण ( सफाई ) अभियान में जुडा है। जैन परम्परा ओर धर्म सदैव सुकृत कार्यो ओर प्रभु भक्ति ओर समर्पण के लिए सदैव तत्पर रहता है।प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी पर्युषण पर्व प्रारम्भ होने के पूर्व एक साथ 2000 जैन मन्दिरों का शुद्धिकरण कार्य परम पूज्य आचार्य देवेश जन-जन की आस्था के केन्द्र श्री नवरत्नसागर श्री महाराजा की विशिष्ट प्रेरणा से उनके कृपा पात्र शिष्य पूज्य आचार्य श्री युवा सम्राट महामांगलिक प्रदाता श्री विश्वरत्न सागर जी महाराज साहब की छत्र छाया में नवरत्न परिवार एवं मालवा महासंघ बेनर तले विगत 12 वर्षो से सतत् करते हुए अपने 13 वे वर्ष में संपूर्ण मालवा, राजस्थान, मध्यप्रदेश, वागड़,उतराखंड, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र,गुजरात सहित अन्य प्रदेशों में स्थित 2000 जैन मंदिरों का एक साथ शुद्धिकरण (सफाई) अभियान में जुडा है। जिसमें सम्पूर्ण नवरत्न परिवार एवं मालवा महासंघ के सदस्य इसमें बढ़-चढ़ कर भाग लेते है, जैन परम्परा में पर्युषण महापर्व का बहुत महत्व है जिस प्रकार दीपावली के पूर्व हर्षोल्लास के साथ घर आंगन की साफ सफाई आदि कार्य किये जाते है उसी प्रकार पयुषण महापर्व के पूर्व विगत 12 वर्षो से जैन मन्दिरों के शुद्धिकरण किया जाता है इस अभियान की शुरूआत म.प्र. के 200 जैन मन्दिरों से प्रारम्भ की गई थी जो आज पूरे भारत के विभिन्न प्रदेशों में स्थित 2000 जैन मन्दिरों तक पहुंच गई है| इस विधि द्वारा किया जाता है,शुद्धिकरण- मन्दिरों में प्रतिष्ठित पाषाण एंव धातुओं की मूर्तियों को विभिन्न औषधियों से विलेपन किया जाता है व उनमें वर्ष भर में हुई अशुद्धियों को विभिन्न औषधियों के माध्यम से विलेपन कर दूर किया जाता है एवं विधिवत उनका नवहन कराया जाता है । शिखर से लेकर फर्श तक मन्दिर एवं उपाश्रय की प्रत्येक वस्तुओं की साफ-सफाई की जाती है । जैसे धार्मिक पुस्तके, उपकरण, बर्तन, सहित अन्य मन्दिर में मौजूद सभी सामान की भी साफ सफाई की जाती है।
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