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: श्री दादा दयालु हनुमान अखंड कीर्तन में वो जिनका प्रभू मिलन हो गया किंतु उनके भजनों की गूंज आज भी पहरा देती है

Admin

Mon, Apr 7, 2025
  सरदारपुर। इन्दौर अहमदाबाद मार्ग पर माही तट पर विराजित अत्यंत रमणिक मनमोहक सिद्ध क्षेत्र में स्थित दादा दयालु हनुमान का प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर चंगे बाबा ने इस स्थान को सिद्ध किया है। इनका नाम दयालु इसलिए पढा कि ये साफ सुथरे छल कपट से रहित भक्तो की मनोकामनाएं शीघ्र ही पूरी करते हैं। और इनके दर पर वही भक्त आ सकते हैं। यहां पर 90 वर्षों से रामनवमी से हनुमान जयंती तक अंखड भजन कीर्तन 24 घंटे दिन-रात होते है। जहां बारी बारी से दो दो घंटे के अंतराल से भक्तजन प्रस्तुति देते हैं। इस प्रकार 12 दल है जिनमें करीब 500 सौ से अधिक पहरेदार सम्मलित है। 12 से 4 तक महिलाएं भजनों की प्रस्तुतियां देती है। इस आयोजन का इंतजार भक्तो को बड़ी सबरी से रहता है। भजन कीर्तन मे उन पहरेदारों की यादों और स्मरणो को याद किया जाता है, जिन्होंने वर्षों तक इस आयोजन में अपनी उपस्थिति दर्ज की थी, और जिनका प्रभू मिलन हो गया। किन्तु उनके भजनों की प्रस्तुतियों की अमिट यादे आज भी पहरा देती है, जैसे इस प्रतिनिधि ने ज्ञात किया। पहरेदारों की स्मृति में सीताराम सीताराम कहिए, जाहे विधि राखे राम,ताहि विधि रहिए, प्रभू सेवक मदनलाल पंवार, अब सौप दिया है जीवन सब तुम्हारे हाथों में रमेशचंद्र पाठक, हरे राम हरे राम राम राम हरे, हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे, मिश्रीलाल चौधरी, श्रीराम जानकी बैठे हैं मेरे सिने में प्रहर्ष तिवारी, लाल लंगोटो हाथ में सोटो, तेरी जय हो पवन कुमार, ओमप्रकाश शर्मा, गुरु मेरी पटिया पर रामनाम लिख दो, करणसिंह यादव, दुनिया चलेना श्रीराम के बिना, और रामजी चलेना हनुमान के बिना, हितेश गौराना, श्रीराम जानकी बैठे हैं मेरे सिने में, गोपाला पाठक, ना जी भरके देखा, ना कोई बात की बड़ी आरजू की मुलाकात, प्रथम गर्ग, सत्संग में म्हारो मन लागियो, अशोक आर्य, राधे राधे जपो, चले आएंगे बिहारी, निर्मोही अखाड़ा के अंशुल तिवारी इस आयोजन में पहरेदार भजनों पर झुम झुम पर नाचते हैं, कब भजन दल का समय पूरा हो जाता है पता नहीं लगता है। इधर श्रीदादा दयालु हनुमान मंदिर परिसर सुन्दर विधूत साजसज्जा से नजारा स्वर्ग जैसा लग रहा है,जो भक्तों को अपनी और आकर्षित करता है।

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