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: बदि कुछ समय हावी हो सकती है पर आखिरी में जीत हक की होती है, हुसैनीअत जिंदा करना वक्त का तकाजा - हाफिज मुस्तफा

Admin

Fri, Jul 28, 2023

     

बदनावर @ अल्ताफ मंसूरी । हक और बातिल की लड़ाई  आदम अलैहिस्सलाम से लेकर आज तक जारी है ।,बातिल चाहे कुछ वक्त के लिए खुश होलें मगर जीत हर हाल में हक की होगी। मोमिन को हमेशा हक वह ईमान पर अडिग रहना चाहिए यही हुसैनीअत और वक्त का तकाजा है। यह बयान मदीना मरकज मस्जिद में जुम्मे के खुत्बे के पहले नमाजियों से मुखातिब होते हुए हाफिज मुस्तफा मेहर ने कहे।

आपने कहा कि हुसैन तो आए ही हक पर शहीद होने के लिए थे, जिसकी बशारत मोहम्मद सल्लल्लाहो सल्लम ने पहले ही कर दी थी। हमें भी हक पर कुर्बानी देने वाले जज्बे की जरूरत है। पर हम लोग आज कहां पर हैं? क्या हमने हुसैनी जज्बा है? उन्होंने जंग में भी नमाज नहीं छोड़ी हम नमाज छोड़कर दुनिया  दस्तूर में लगे हुए हैं।हमें यजीद से नफरत है क्योंकि वह इमाम हुसैन का कातिल है । अब गौर करना यह जरूरी है कि इमाम हुसैन को यजीद से नफरत क्यों थी? दरअसल यजीद एक बदकार शराब खोर, बदनियत, जुआरी व फासिक था। आज हम लोगों में  यह  यजियत के काम मौजूद है, जो हमारे लिए शर्म की बात है। आज हम हक और बातिल में फर्क नहीं कर पा रहे हैं। यदि हम सच्चे आशिक ए रसूल व हुसैनीअत  वाले हैं तो सब बुरे कामों को छोड़कर नेक अमल करने वाले बने। जब जब यजियत खड़ी हो हम उसका मुकाबला करें ना कि हुसैनीअत का दिखावा। मोहरम की अहमियत इस्लामी की शुरुआत से है। गैर इस्लामी रस्म करके मोहरम व इस्लाम को बदनाम ना करें। ढोल और डीजे से परहेज करें, औरतें पर्दे में रहे।

आप शरीयत पर चले वह अपने अमल  का आकलन करें। यह वक्त कुरान और शरीयत को समझने का है। अल्लाह ताला ने फरमाया जो मेरे दिन में नई  बातों को जन्म देगा वह जहन्नुम में जाएगा। शरीयत उन दरवाजों को बंद कर देती है जिससे शीर्क  आने का अंदेशा हो।  आपने आगे बयान किया कि अल्लाह ताला हर चीज का गालिब है। किसी के इस दुनिया में आने जाने से दुनिया में कोई फर्क नहीं पड़ता है। जब तक इस जमीन पर कलमा पढ़ने वाला है दुनिया चलती रहेगी। दुनिया का पूरा निजाम अल्लाह ताला के हाथ में है। मोहर्रम पर अपने परिवार पर उम्दा खर्च करें। मोहरम के आशूरा के रोजे की बड़ी अहमियत है।

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