ब्रेकिंग

नगर केमिस्ट एसोसिएशन का हुआ गठन, जाट अध्यक्ष,मारू बने सचिव

सरदारपुर में जनगणना अन्तर्गत मकान सूचीकरण का कार्य हुआ प्रारंभ, प्रगणकों के द्वारा तैयार किया जा रहा है मैप

तहसील विधिक सेवा समिति द्वारा श्रम दिवस पर विधिक साक्षरता शिविर का किया आयोजन

पिकअप हादसे मे मृत ग्रामीणो के परिजनो को विधायक ग्रेवाल देंगे 25-25 हजार की सहायता

भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

सूचना

: प्रेमिका आपको प्रेम दे सकती है,पुत्र नहीं-पंडित कमल किशोर जी नागर,आदिवासी अचंल देदला में भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ हुई भागवत कथा,माॅ शबरी के मंदिर की भी हुई प्राण प्रतिष्ठा,पहले ही दिन छोटा पडा कथा पंडाल

Admin

Wed, Feb 28, 2024
https://youtu.be/YAQ-U_yQxyc

 

सरदारपुर। सेवा ही अमृत है अमृत पाना है तो सेवा करो सेवा किसी रूप में भी हो सकती हे सेवा करने से व्यक्ति छोटा नहीं होता है। उक्त उद्गार आदिवासी अंचल देदला मे श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराते हुये मालव माटी मे माँ सरस्वती के वरद पुत्र पंडित कमल किशोर जी नागर ने व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को कहे।
पंडित नागर जी ने कहा कि काम करने से कोई कमजोर नहीं होता हैै। समय और परिस्थिति बदल रही हे। आप काम और परिश्रम नहीं करते हो तो अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते है।


पंडित नागर जी ने व्यासपीठ से कहा की धार जिला उनका प्रिय है। यहा के लोगों के अपनत्व की बात ही निराली हैै।। ये धार तलवार की धार नही है बल्कि यह वह धारा है जो महादेव के ऊपर अभिषेक करते समय अविरल बहती रहती है कभी खंडित नहीं होती यह वह धार हैै। यह धार कभी भी कथा में पंडाल खाली नहीं होने देता है चाहे आधी रात को भी बुलाओ श्रद्धालु दौडे चले आते है।


आपने कहा की घर,परिवार,समाज और जिस राज्य मे कान भरने वाले ज्यादा और काम करने वाले कम हो उसे बर्बाद होने मे समय नहीं लगता है। आपने श्रद्धालुओं से कहा की कथा पंडाल में बस मे बैठी सवारी की तरह बैठो जब कथा का श्रवण करो तो एक कान से सुनकर उसे दुसरे कान से मत निकालो। मन की बुराइयों को उस प्रकार त्याग कर दो जब बस मे सवारी एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन पर उतरती है वही कथा का श्रवण कर उससे मिलने वाली अच्छी बातो को ग्रहण कर उसे मस्तिष्क से टकराने दो और दिमाग मे बिठा लो।


वर्तमान मे फैली कु संस्कृति पर कटाक्ष करते हुये आपने कहा की प्रेम प्रेम होता है वह किसी स्त्री पुरुष में नहीं बल्कि पति-पत्नी मे होता है। आज कल लोग प्रेमी और प्रेमिका कहा से ले आये पता नही चलता। आपने कहा की प्रेमिका आपको प्रेम दे सकती है लेकिन पुत्र नहीं ।
युवा पीढ़ी को सचेत  करते हुये आपने कहा की आपके माॅ-बाप बडी मेहनत कर आपको बहार पढने भेजते है लेकिन स्कुल कालेज जाकर कुछ युवा बिगड जाते है इससे तो अच्छा आप ढोर चराओ।
आपने कहा की लोग ढोर पाल लेते है लेकिन मां बाप नहीं पाल सकते है। कहते है की इन्होने क्या दिया पैसा नहीं दिया जमीन नहीं दी अरे इन्होने तो तुझे जन्म दिया यदि माँ-बाप तुझे जन्म नहीं देते तो तेरा इस धरती पर अस्तित्व ही नही रहता । इसलिये बुढापे मे अपने माॅ बाप का सहारा बने उन्हें अपने से अलग नही छोडे ।


कथा के प्रथम दिन की कथा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भर चुका था। पंडाल मे जगह नहीं मिलने पर कुछ श्रद्धालु तो धुप मे बैठकर भी कथा श्रवण करते रहे। कथा आरंभ के पूर्व गांव से कथा स्थल तक कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा मे महिला परंपरागत आदिवासी वेशभूषा मे कलश सर पर लेकर शामिल हुई कलश यात्रा कथा स्थल पर गौशाला मे हनुमान मंदिर पर आकर समाप्त हुई जहां पर पूजा  अर्चना कर कथा के यजमान ओसारी,जामनिया  एंव भाभर परिवार के सदस्य श्रीमद भागवत पौथी को सिर पर लेकर कथा पंडाल मे पहुॅचे जहां पर व्यासपीठ पर श्रीमद् भागवत पोथी विराजित कर दोपहर मे करीब दो बजे पंडित कमल किशोर जी नागर के द्वारा कथा आरंभ की गई।


आदिवासी अंचल देदला से जुडने के वृतांत पर प्रकाश डालते हुये पंडित नागर जी ने बताया की काफी वर्ष पुर्व करीब 1992 मे यहा पर आए थे तब यहा पर बड़े माडसाब (स्वर्गीय अमरसिंह जामनिया) से एक पेड की निचे मुलाकात हुई। धीरे-धीरे इस गांव के लोग जुडते गये और कारवां बढ़ता गया। आपने कहा की बडे मारसाब और स्वर्गीय गंगाराम औसारी के द्वारा यहा पर गौ सेवा की जो फसल बोई गई थी वही फसल आज इस बडे गौधाम के रूप मे लह लहा रही है।
पंडित नागर जी ने कहा की देदला के लोग काफी वर्षो से हमसे जुड़े हुये है हर कथा मे आते है इनके मन मे भी विचार था और हमारे मन मे भी की एक दिन ऐसा आये की ये लोग यजमान बने और कथा का श्रवण करे। हमने सोचा था की कथा तो देदला मे ही करना है लेकीन संशय था की 100 घरो की छोटी सी बस्ती दूर दूर तक पथरीला इलाका पंडाल भरेगा की नही लेकीन जब माही डेम भर सकता है तो कथा पंडाल क्यो नही। आपने कहा कि बांध के किनारे छोटी से बस्ती मे इस गौधाम का आकार लेना यहा के गौ सेवकों की श्रद्धा एंव विश्वास के चलते ही संभव हो पाया है।


शबरी मंदिर मे हुई प्राण-प्रतिष्ठा- कथा समापन के बाद गौशाला परिसर मे नवीन बने शबरी मंदिर मे विधिवत भगवान श्रीराम, ओर लक्ष्मण माॅ शबरी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा  हुई पंडित कमल किशोर जी नागर के हाथो हुई । मांदल की थाप और बांसुरी की स्वर लहरियों के बीच नृत्य करते आदिवासियों ने उत्साह के साथ प्राण प्रतिष्ठा मे भाग लिया।
कथा के दौरान एसडीओपी आशुतोष पटेल के मार्गदर्शन मे राजगढ,सरदारपुर एंव अमझेरा थाने का पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था मे मुस्तैद नजर आया।


वही कथा के दौरान गौशाला समिति बरमंडल,बरमखेडी,बरखेड़ा,लाबरिया  आदि के गौभक्तो ने स्टाल लगाकर  जल पान व्यवस्था को संभाला वही खुटपला गौशाला ने गौशाला मे निर्मित सामानों को विक्रय हेतु रखा गया था।  कथा के प्रथम दिन भोजन प्रसादी का लाभ लाबरिया के गौभक्तो के द्वारा लिया गया।  

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें