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: प्रदेश की पहली महिला गृहमंत्री बन सकती हैं उषा ठाकुर ! प्रदेश के भावी मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों की संख्या और वजन बढ़ने वाला है

कांग्रेस को यदि महू में वापसी करनी है तो अंतर सिंह दरबार को पार्टी में लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं

इंदौर। महू विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह से उषा ठाकुर ने धमाकेदार जीत प्राप्त की है। उससे भाजपा की राजनीति में उनके कद में अत्यधिक इजाफा हुआ है। जाहिर है पार्टी उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका में लाना चाहेगी। उषा ठाकुर को संघ के मालवा प्रांत के पदाधिकारियों का समर्थन मिलता रहा है। पिछली बार उन्हें संघ की सिफारिश पर ही पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय दिया गया था। प्रदेश में मंदिरों के पुनर्निर्माण के अनेक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इन परियोजनाओं को जारी रखने के लिए सबसे अधिक संभावना तो यही है कि उन्हें इसी मंत्रालय के साथ कैबिनेट मंत्री बनाया जाए, लेकिन इस बार भाजपा को जिस जबरदस्त तरीके से महिलाओं का समर्थन मिला। उसे ऐसा लगता है कि प्रदेश के भावी मंत्रिमंडल में महिला मंत्रियों की संख्या और वजन बढ़ने वाला है।

इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि 7 या 8 दिसंबर को मुख्यमंत्री के रूप में लगातार पांचवीं बार शिवराज सिंह चौहान शपथ लेने जा रहे हैं। पिछली बार के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए हैं। इस बार गृहमंत्री पद के लिए गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, विश्वास सारंग जैसे नेता दावेदार रहेंगे। ऐसे में यदि पार्टी ने किसी महिला को गृहमंत्री पद की जवाबदारी देने पर विचार किया तो उषा ठाकुर इस पद की प्रबल दावेदार रहेंगी।

इसके अलावा यह भी संभावना है कि उन्हें विष्णु दत्त शर्मा की जगह प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। विष्णु दत्त शर्मा का कार्यकाल इस वर्ष अगस्त में ही समाप्त हो गया है। पार्टी ने उन्हें एक्सटेंशन दिया हुआ है। विष्णु दत्त शर्मा ने जिस तरह से संगठन की जमावट की इस कारण से उनके नंबर बढ़े हैं। ऐसे में संभावना यही है कि उन्हें लोकसभा चुनाव तक बरकरार रखा जाए। लोकसभा चुनाव मई में संपन्न हो जाएंगे। ऐसे में अगले वर्ष सितंबर से संगठन चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती है। उस दौरान उषा दीदी को संगठन की कमान मिल सकती है। तब तक उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में रखा जा सकता है। वैसे भी उषा दीदी प्रदेश महामंत्री के रूप में लगातार चार बार काम कर चुकी हैं। इसलिए उन्हें संगठन के काम की अच्छी जानकारी है।

जितना जल्दी हो सके कांग्रेस ने दरबार को पार्टी में शामिल करना चाहिए

महू विधानसभा क्षेत्र में पहली बार कांग्रेस तीसरे नंबर पर खसक गई। यहां कांग्रेस से बगावत कर चुनाव लड़े अंतर सिंह दरबार ने लगभग 69000 वोट प्राप्त किए। कांग्रेस के रामकिशोर शुक्ला को महज 28000 मत मिले। उषा ठाकुर 1 लाख 2000 मत प्राप्त कर लगातार दूसरी बार और कुल मिलाकर चौथी बार विधायक बनी। महू की हार इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि एक समय महू को कांग्रेस का मजबूत किला माना जाता था। 1977 के लोकसभा चुनाव की जनता लहर में जब कांग्रेस को पूरे मध्य प्रदेश में मात्र 22 विधानसभा क्षेत्र में बढ़त मिली थी तो उसमें महू भी शामिल था।

यहां जनता पार्टी के लोकसभा उम्मीदवार कल्याण जैन साढ़े सात हजार वोटों से पीछे थे। 1977 के विधानसभा चुनाव में भी जनता पार्टी यहां हारी थी। जबकि प्रदेश में उसकी दो तिहाई बहुमत से सरकार बनी थी। 2003 के चुनाव में भाजपा के प्रचंड तूफान में भी कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी।
महू के कांग्रेस के इस गढ़ को तोड़ने के लिए भाजपा को कैलाश विजयवर्गीय को भेजना पड़ा था, जिन्होंने 2008 और 2013 में जीत दर्ज कर इस क्षेत्र को भाजपा के गढ़ में परिवर्तित किया। जाहिर है इस चुनाव ने महू क्षेत्र से कांग्रेस का सफाया कर दिया है।

अब स्थिति है कि इस विधानसभा सीट पर वापसी करना कांग्रेस के लिए बेहद मुश्किल होगा। यदि कांग्रेस को अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाकर रखना है और इस क्षेत्र में वापसी करनी है तो अविलंब अंतर सिंह दरबार को पार्टी में शामिल करना चाहिए। वैसे भी जो समीकरण बने हैं उसके हिसाब से अब कमलनाथ मध्य प्रदेश को छोड़ देंगे। उनका दो-तीन दिन में प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा आ जाएगा। हालांकि पार्टी लोकसभा चुनाव तक उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर रखेगी। यह भी तय है कि 2024 में वो छिंदवाड़ा से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में चले जाएंगे। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस की राजनीति दिग्विजय सिंह और उनके पुत्र जयवर्धन सिंह करने वाले हैं। कांग्रेस में अभी से माना जा रहा है कि विधायक पद पर निर्वाचित हुए अजय सिंह राहुल को दिग्विजय सिंह प्रदेश अध्यक्ष बनवा सकते हैं।

जाहिर है प्रदेश कांग्रेस के सभी समीकरण अंतर सिंह दरबार के पक्ष में जाने वाले हैं। ऐसे में पार्टी को चाहिए कि दरबार को फिर से शामिल करे, जिससे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस थोड़ी बहुत टक्कर दे सके। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अंतर सिंह दरबार ने 69 हजार के लगभग मत लाकर इतिहास रच दिया है। जाहिर है कांग्रेस उनकी अनदेखी नहीं कर सकती। महू विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की भी यही इच्छा रहेगी कि अंतर दरबार जल्दी से जल्दी आकर उनका नेतृत्व करें।

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