श्रीमद् भागवत कथा : उत्साह के साथ मना श्रीकृष्ण जन्मोत्सव,श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग पर समूचा पांडाल गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हुआ
Bakhtavar Express
Mon, Jul 28, 2025
चिराखान। धर्ममय वातावरण से परिपूर्ण ग्राम के दक्षिण दिशा मे स्थित जयन्ती दिव्य धाम मंदिर परिसर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें पं.देवकीनंदन शास्त्री ने मधुर धुन में संगीतमय कथा का श्रवण श्रद्धालुओं को करा रहे है। कथा के चौथे दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। महिलाएँ एवं पुरुष पिले वस्त्र धारण कर कथा श्रवण करने पहुंचे। जन्मोत्सव में एक नन्हें से बालक को कृष्ण रूप में सजाकर नंदबाबा बने श्रद्धालु अपने सिर पर टोकरी में बिठा कर लाए। कृष्ण जन्म के प्रसंग शुरू होते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु "नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैयालाल" की भजनों के साथ झूम उठे। वहीं श्रद्धालुओं ने माखन मिश्री का भोग लगाकर प्रसादी वितरित की। श्रद्धालुओं द्वारा संपूर्ण पंडाल को रंग बिरंगे गुब्बारे,आम व केले के पत्तों आदि से सजाया गया एवं मटकी फोड़ी गई। श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को हल्दी के छापे व रंग गुलाल लगाया।

ज्ञान रुपी अंकुश से मन को वश में किया जा सकता है
कथा वाचक पं.शास्त्री ने कहा कि जिस तरह हाथी को वश में करने के लिए अंकुश की आवश्यकता होती है। उसी तरह मन रुपी हाथी को वश में करने के लिए ज्ञान रुपी अंकुश की आवश्यकता होती है।
उन्होंने आगे कहा कि गंगाजल को यदि हम एक बर्तन में भरकर रख दे फिर भी वही कई वर्षों तक पवित्र होता है। जब कि गंगा मे कई मुर्दे, गंदी नालियों का पानी मिलता है फिर भी वह पवित्र होता है और यदि मनुष्य की जिन्दगी में कुछ भी हो जाए तो वो अपवित्र हो जाता है। संतान को भागीरथ की तरह होना चाहिए। जो अपने माता पिता सहित परिवार का उद्धार कर सके। आयोजन में मां जयंती माता सेवा समिति अध्यक्ष अनिल पाटीदार मोतीलाल जी पाटीदार, उपा अध्यक्ष महेश जाट, गोविंद पाटीदार , मुन्नालाल पाटीदार,हरिनाराण पाटीदार, बालाराम पाटीदार,रमेश जी जायसवाल दसाई ,परमानंद पाटीदार,मदनलाल पाटीदार,बिशन नायक,भगवती मारू पदमपुरा, शंकरलाल पाटीदार, घनश्याम नायक,सहित चिराखान पदमपुरा, बालोद, व दसाई सहीत आस पास के क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु कथा का रसपान कर रहे हैं।

विभिन्न प्रसंग सुनकर मंत्र मुग्ध हो गए श्रद्धालु
कथा वाचक पं.देवकीनंदन शास्त्री ने कृष्ण जन्मोत्सव के पूर्व भगवान राम के अवतार की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान राम ने प्रेरणादायी आदर्श स्थापित किया है। वह आज भी प्रासंगिक है। राम जन्म, ताड़का वध, राम विवाह, विवाह वनवास, रावण वध सहित राम राज्य विषय पर सुंदर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि द्वापर में जब कंस के अत्याचार बढ़े तो श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर मुक्ति दिलाई। ऐसे विभिन्न प्रसंग सुनकर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध हो गऐ।
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