श्री कृष्ण पाथेय को लेकर अमझेरा मे परिचर्चा : द्वापर काल मे जिन रास्तो से गुजरे कृष्ण उन्हे खोजने के लिए है श्री कृष्ण पाथेय
Bakhtavar Express
Mon, Aug 25, 2025
अमझेरा।। जहा जहा श्री कृष्ण के चरण पड़े उन स्थानों को तीर्थ के रूप मे विकसित करने कि योजना अब साकार हो रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विगत दिनों जन्माष्टमी पर अति प्राचीन अमका झमका तीर्थ दर्शन पूजन के लिए पहुंचे थे। मुख्य्मंत्री यादव ने कहा था कि गोकुल, मथुरा कि तरह प्रदेश मे भी भगवान श्री कृष्ण जिन स्थानों पर पहुंचे है उन्हे बड़े तीर्थ के रूप मे सरकार विकसित करेगी। साथ ही श्री कृष्ण पाथेय बनाकर उन स्थानों को जोड़कर धार्मिक क्षेत्र मे एक नई पहल कि जा रही। इसी उद्देश्य को लेकर अमका झमका मंदिर पर महाराज विक्रमादित्य शोधपीठ संस्कृति विभाग के द्वारा श्री कृष्ण पाथेय को लेकर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा कि शुरुआत मे उज्जैन से आये पुरात्विद, इतिहासकारों का अमका झमका विकास समिति के सदस्यों द्वारा अम्बिका माता का चित्र भेट कर एवं पुष्प माला, दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया।

अमका झमका मंदिर हरण नही वरण स्थल है- डॉ रमण सोलंकी
परिचर्चा को सम्बोधित करते हुए पुरात्विद डॉ रमण सोलंकी ने बताया कि मंदिर कि शैली एवं यहां परिसर मे स्थित मूर्तिया हजारों वर्ष पूर्व कि है इन्हे सहेजने कि आवश्यकता है। साथ ही सोलंकी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने रुखमणि का हरण नही उनका वरण किया था हमे हरण नही वरण शब्द का उपयोग करना चाहिए । अश्विनी शोध संस्थान के निदेशक डॉ आर सी ठाकुर ने कहा कि हमारा जो गौरव पूर्ण इतिहास रहा है वो आने वाली पीढ़ी देखे और समझे इसको लेकर हमे कार्य करना चाहिए। साथ ही यह स्थान महत्वपूर्ण है हम सब को मिलकर इसका प्रचार कर यहां आने वाले पर्यटको एवं दर्शनार्थियों के लिए क्या क्या सुविधाएं होना चाहिए इन पर विचार करने कि आवश्यकता है।
विक्रम विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य राजेश कुशवाह ने कहा कि द्वापर काल मे भगवान श्री कृष्ण जिन रास्तो से होकर गुजरे उस मार्ग को खोज कर विकसित करने कि योजना है श्री कृष्ण पाथेय। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा उत्तरप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और मप्र के वे स्थान जहा से श्री कृष्ण गुजरे है उन सभी स्थानों का विशेष महत्व है जिसमे उज्जैन का नारायणा, जानापावा एवं अमझेरा सहित स्थानों को सरकार ने विकसित करने का संकल्प लिया है। परिचर्चा को डॉ अजय शर्मा, हेमंत शर्मा ने भी सम्बोधित किया। संचालन तिलकराज सोलंकी एवं आभार राजेंद्र कुमार शर्मा ने माना। इस दौरान एस डी ओ पी विश्वदीप सिह परिहार, टी आई राजू मकवाना समिति के अध्यक्ष प्रकाश राठौड़, शिवा मकवाना, अर्पित शर्मा, सुमित पंडित, निशित पंडित आदि मौजूद थे।
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