शासन स्तर पर अमझेरा को तहसील बनाने की मांग सन 2000 से लंबित है । जिसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2008 में स्वयं जनदर्शन कार्यक्रम मे अमझेरा को तहसील बनाया जाना राजगढ की विशाल आमसभा में घोषित किया था। जब पूरे सरदारपुर जिसमे दसाई के भी सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद थे उन्होंने करतल ध्वनि से मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत किया था । दसाई वालों को विगत दिवस के अमझेरा को तहसील ना बनाने के विषय मे प्रबुद्ध जनता यह बताना चाहती है कि सरदारपुर तहसील को तोडकर तहसील नही बननी हैं । तिरला विकासखंड, गंधवानी विकासखंड व सरदारपुर विकासखंड के वृहद क्षेत्र पंचायतों को जोड़कर अमझेरा के मध्य मे रहने के कारण अमझेरा को तहसील बनने की पात्रता सबसे प्रमुख हैं अमझेरा के आसपास के पांच से पन्द्रह कि मी के लोग हर सप्ताह हाट बाजार करने, व्यवसायिक कार्यो का लेनदेन हेतु अमझेरा प्रतिदिन आते जाते रहते है बैंक ऑफ इंडिया, नर्मदा झाबुआ बैंक, व जिला सहकारी बैंक के साथ सहकारी वनोपज समिति का केंद्र भी अमझेरा ही है ,, सरदारपुर तहसील का सबसे बडा ग्राम हैं । मतदाताओं के लिहाज से भी सबसे ज्यादा दस मतदान केन्द्र अमझेरा मे ही हैं जो पंचायत स्तरीय चुनाव मे पन्द्रह बनाए जाते हैं ।
अमझेरा तहसील बनने मे निम्न महत्वपूर्ण बिंदूओ पर भी ध्यानाकर्षण आवश्यक है - पूर्व समय मे आमला के अंदर गांव विकासखंड तिरला के गांवो का थाना भी तिरला होता था । जब एक वारदात होती थी , तो तीन घंटे पैदल चलकर आमला तक आकर संबंधित रिपोर्टकर्ता बस से वाया अमझेरा से जाकर तिरला थाने पर रिपोर्ट करने जाता था, व दिनभर के समय व धन का अपव्यय होता था जिसे बाद मे इन्ही कारणों को मध्यप्रदेश गृह विभाग ने समझकर अमझेरा थाने मे गंधवानी, तिरला , बदनावर के ग्रामो को अमझेरा थाने मे मिलाकर लोगों को सुविधा दी । वहीं बात तहसील बनने मे तीन ब्लॉक की जनता की सुविधा को देखते हुए विभिन्न पंचायतों के माध्यम से अमझेरा को तहसील बनाया जाना मध्य में होने के कारण प्रस्तावित किया गया हैं ।
अमझेरा स्टेट समय से कंटोनमेंट बोर्ड के रूप मे 1956 से पंचायत का रूप बनी हैं । 1604 से 1858 तक अमझेरा राज्य के रूप में दसाई एक ग्राम के रूप में था जिसको सुविधा के तौर पर कचहरी बनाया गया था । अमझेरा एक समय स्वयं राज्य था, बाद में जिला ,व परगना (तहसील) रहा है । जहां सबसे पहले थाना, पहला पोस्ट आफिस ,सबसे पहली हायर सेकेंडरी 1962 में बनने का क्रमिक रूप रहा हैं । इस अमझेरा की तहसील बनाने की प्रक्रिया को चुनौती देना समझ से परे हैं ।
अमझेरा मध्य में होने से गंधवानी विकासखंड की पन्द्रह से बीस कि मी की गूंगी देवी, जलोख्या, बिजलपुर पांचपिपला, गोलपुरा, गडवारा, बलेडी, केशवी, पिपल्या, रतनपुरा ,रोजाबयडा, सहित विभीन्न पंचायते तिरला विकासखंड की आमला,मिनाखेडी, सांगवी जूनापानी, उकाला पर्वतपूरा, खिडक्या , सहित सरदारपुर तहसील के पन्द्रह किमी की चालनी, मिंडा,मवडीपाडा, गोलपुरा बोरखेडी , सुल्तानपुर,बांदेडी, खांकेडी मारोल, इडरिया, केशरपुरा, सगवाल ,बालोदा, घटोदा भिलगुन स्वयं दसई ,चिराखान पंचायत व बदनावर विकासखंड के खिलेडी, कडोद, सीलोदा तक की पंचायतो का क्षैत्र रहेगा । तहसील कोई सरदारपुर से हीं नही बनना है अमझेरा मध्य का क्षेत्र हैं इसे दसई के प्रबुद्ध नागरिकों को समझना चाहिए । यहां अमर शहीद बख्तावर सिंह की शहादत कर्मस्थली का गौरव है इसे कमतर नहीं आंकना चाहिए । अमझेरा के नागरिकों का मानना हैं कि दसई को भी अमझेरा तहसील मे मिलना है फिर भी अगर दसाई के नागरिकों अमझेरा के साथ नहीं रहना चाहते है तो वे सरदारपुर मे ही रहे , परंतु व्यावहारिक तौर पर दसाई को भी अमझेरा तहसील मे रहने से बड़ा लाभ होगा ।
अमझेरा को गंधवानी से जोड़ने की बात बेहुदा व हास्यास्पद हैं । अमझेरा तहसील बनने की अंतिम दौर की कवायद में दसाई वालों का धरना, प्रदर्शन व दिनांक 25 अगस्त को बंद रखने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण हैं क्योंकि धरातलीय स्तर पर दसाई तीन अन्य ब्लाको का मध्य नही है व्यवहारिक तौर पर अन्य विकासखंड के लोग क्यों कर चालीस कि मी दूर एकदम दूरस्थ दसाई तहसील मे सहभागी बनेंगे ।यह प्रश्न विचारणीय होगा ।